मोटा भाई चला लेगा ना तू? हाँ, भ्राता यह तो पानी है ,
में तो नॉन ग्रेविटी ज़ोन में भी चला सकता हूँ ।
बताओ भाईजान फिर, पहले "मंगल पर लेकर चलू या चंद्रमा" पर, ऐसा कर पहले कश्मीर ले चल, मेरा बचपन से सपना था डल झील पर बस चलवाने का, पर तू चलेगा कैसे उधर तो '370 ओर 35A' लगी हुई है ! बाहर के वाहन नही जा सकते ? अरे भाईजान आपने ड्राइवर बनाया है मुझे अपना चिंता काहे कि, दिल्ली वाले रास्ते से चलेगे 370 ओर 35A 'आर्टिकल की किताब उधर ही है उसको फाड़ देंगे ओर नई क़िताब रखा देंगे फिर कोई घंटा नही रोखा सकता हमारी बस को, अच्छा किन्तु जो नई क़िताब होगी ना उसके पेज कश्मीर के होने चाहिए ऐसा लिखा हुआ है आर्टिकल में, । भ्राता काहे इतनी चिंता करते हो इतना तो मैने, इशरत जहां को जब बस से उड़ाबया था अब भी नही सोचा था । बताओ आज तक चालान हुआ मेरी बस का? 'चालान लोकतंत्र में होता है अब भीड़तंत्र है'। घंटा कुछ नही होगा । विश्वास है तुझ पर मोटा, किन्तु मेरी तो किसी भी बस ने गोधरा में किसी को नही उड़ाया था मैने तो उनकी बस को उनकी तरफ मोड़ दिया था, फिर भी बहुत वक़्त लगा मुझे अपनी बस का चालान कैंसिल कराने में ।
भ्राता श्री, जब हमारे बस बहुमत नही था ! अटल जी ने बोला भी था आज हमारे पास बहुमत नही है वरना में बस से जाकर 'कबाब' श्रीनगर मैं ही खाता । भाईजान हम तो कबाब भी नही खाते ओर बहुमत भी है हमारे पास । और कश्मीर के नो एंट्री ज़ोन में जाएंगे तो 120 करोड़ भारतीयों को फ्री में ही मज़े आएंगे ओर एंटरटेनमेंट भी हो जाएगा उनका, मोटा वो तो ठीक है और कश्मीर वालो ने बगावत की तो? उड़ा देंगे सालो को वैसे भी अलगाववादी ओर पत्थरबाज़ है सबकी नजर में सच में भी है बहुत से, क्या फर्क पड़ेगा किसी को !! ठीक है मोटा भाई, फिर डाल दे बस को 56वे गियर में लालचौक के लिए । ~#सुमितमोंस के ब्लॉग से ।
में तो नॉन ग्रेविटी ज़ोन में भी चला सकता हूँ ।
बताओ भाईजान फिर, पहले "मंगल पर लेकर चलू या चंद्रमा" पर, ऐसा कर पहले कश्मीर ले चल, मेरा बचपन से सपना था डल झील पर बस चलवाने का, पर तू चलेगा कैसे उधर तो '370 ओर 35A' लगी हुई है ! बाहर के वाहन नही जा सकते ? अरे भाईजान आपने ड्राइवर बनाया है मुझे अपना चिंता काहे कि, दिल्ली वाले रास्ते से चलेगे 370 ओर 35A 'आर्टिकल की किताब उधर ही है उसको फाड़ देंगे ओर नई क़िताब रखा देंगे फिर कोई घंटा नही रोखा सकता हमारी बस को, अच्छा किन्तु जो नई क़िताब होगी ना उसके पेज कश्मीर के होने चाहिए ऐसा लिखा हुआ है आर्टिकल में, । भ्राता काहे इतनी चिंता करते हो इतना तो मैने, इशरत जहां को जब बस से उड़ाबया था अब भी नही सोचा था । बताओ आज तक चालान हुआ मेरी बस का? 'चालान लोकतंत्र में होता है अब भीड़तंत्र है'। घंटा कुछ नही होगा । विश्वास है तुझ पर मोटा, किन्तु मेरी तो किसी भी बस ने गोधरा में किसी को नही उड़ाया था मैने तो उनकी बस को उनकी तरफ मोड़ दिया था, फिर भी बहुत वक़्त लगा मुझे अपनी बस का चालान कैंसिल कराने में ।
भ्राता श्री, जब हमारे बस बहुमत नही था ! अटल जी ने बोला भी था आज हमारे पास बहुमत नही है वरना में बस से जाकर 'कबाब' श्रीनगर मैं ही खाता । भाईजान हम तो कबाब भी नही खाते ओर बहुमत भी है हमारे पास । और कश्मीर के नो एंट्री ज़ोन में जाएंगे तो 120 करोड़ भारतीयों को फ्री में ही मज़े आएंगे ओर एंटरटेनमेंट भी हो जाएगा उनका, मोटा वो तो ठीक है और कश्मीर वालो ने बगावत की तो? उड़ा देंगे सालो को वैसे भी अलगाववादी ओर पत्थरबाज़ है सबकी नजर में सच में भी है बहुत से, क्या फर्क पड़ेगा किसी को !! ठीक है मोटा भाई, फिर डाल दे बस को 56वे गियर में लालचौक के लिए । ~#सुमितमोंस के ब्लॉग से ।

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