Monday, June 29, 2015

Watching India's Daughter !!

एक तरफ तो हम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की बात करते है | और एक तरफ हम एक ''सच्चे  ऐक्सीडेंट'' पर बनी फिल्म  पर प्रतिबंध लगाते है । ''Reason'' देते है की इस से हमारे समाज पर एक गलत ''Message' 'जायेगा इतनी फिल्मे बनती है उनसे कोन सा सही संदेश जाता है !! ये दोहरा मापदण्ड क्यों ? यहाँ तो भी.…… एक झंझोर देने वाली शर्मनाक घटना है। शायद लोगों को कुछ  सोचने पर  मजबूर करेगी !! --सुमित चतुर्वेदी

Wednesday, June 10, 2015

''साफ-सफाई'':-

Aaj ki New Generation kisi ki ''साफ-सफाई'' KaRe ya Na KaRe bt Vo Apne Computer's KI Browsing History definitely ''साफ'' Karti hai...

गुस्ताखी माफ़ ::-

Ek FILM में चाय बेचने वाला ''मिलियनेयर'' बनता है Real Life में Prime Minister.......काश हम सब चाय वाले होते | किस्मत हो तो चाय बेचने वालो जैसी |

Reading Ethics :-

Mahatma Gandhi Said ''Politics without principle'' Is not possible. हमारे देश में ''Politics तो है | किन्तु Principle'', कहाँ है ?
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सत्य सिर्फ एक है ''शिव''''

Never Expect Anything From Anyone, Because Expectations Always Hurts You....''स्वामी विवेकानंद कहते है जानवर भी कभी अपने बच्चों से या किसी से कुछ ''Expect'' नही करता फिर तो हम '' Human being'' है....हम क्यों करते है । ये सब दुनिया FaKe है। .. सत्य सिर्फ एक है ''शिव''''

सही कहा है किसी ने हम ये देखा रहे की मंगल ग्रह पर जीवन है या नही परन्तु ये कोई नही देखा रहा की जीवन में मंगल है या नही ---

पंतनगर ...
कुछ यादें बाकी हैं अब भी बीत गए उन सालों की 
रौशन चेहरा पापा का और मां के लम्बे काले बालों की 
अटल हिमालय के आँगन में एक बड़ा अहाता था 
विश्व विख्यात विद्यालय था जो पंतनगर कहलाता था
कैम्पस में रहने वाले हम कैम्पस स्कूल ही जाते थे
बस की भागमदौड़ नहीं बस पैडल ही मारे जाते थे
सुबह सुन्दर आनंदित करती दोपहर आराम कराती थी
सुनहले गेंहू की गोल रोटियां मां गरम गरम खिलाती थी
फ़िक्र बंद थे फ़िक्रमंद नहीं सो आराम से हम सो जाते थे
यार दोस्तों को चैन कहाँ बैट बौल के साथ उठाते थे
बिना काम के व्यस्त बड़े थे पर शाम ढले घर आते थे
क्योंकि अक्सर पापा हाट से रामेश्वर के गरम समोसे लाते थे
पता नहीं क्यों समोसों में तब फैट नहीं पाया जाता था
दूध भी घर पर डबल मलाई वाला ही मंगवाया जाता था
आर्गेनिक थीं सभी सब्जियां चाव से खायी जाती थीं
स्ट्रैस जैसी कठिन बीमारियाँ वहां नहीं पायी जाती थी
बगल में रहते बंगाली अंकल रोचक किस्से सुनाते थे
काजी अंकल होली पर सबसे पहले चंदा दे कर जाते थे
“तारक मेहता का उल्टा चश्मा” जैसा वो गोकुल धाम था
पंतनगर पावन अति प्यारा सुन्दर सकल सुख धाम था
ट्रैफिक सिग्नल की लाइट नहीं थी बिना बात की फाइट नहीं थी
टेंशन की कोई साईट नहीं थी , कम पैसों में भी हालत टाईट नहीं थी
पीज़ा हट की बाईट नहीं थी कुछ रास्तों पर भी लाईट नहीं थी
फिर भी अक्सर अँधेरे में जब टहलने घंटा घर को जाते थे
ऊपर तारे नीचे जुगनू हाथ पकड़ ले जाते थे
पर अब चौबीस घंटे लाईट में भी अक्सर अँधेरा हो जाता है
कल तो दिखता ही नहीं और आज भी धुंधला सा ही नज़र आता है
शहर की भागम भाग बड़ी है समय के साथ जंग छिड़ी है
हर एक समस्या बहुत बड़ी है मुश्किल दिखती हर घड़ी है
क्योंकि जो है उसका संतोष नहीं है, खुशीयों का कोष नहीं है
कहाँ हैं इसका होश नहीं हैं , जीने का वो जोश नहीं है
बस निन्यानवे का फेर सभी को चक्रव्यूह सा घुमाता है
मां का वो निर्मल आँचल हर दिन याद आता है
लम्बी छुट्टीयों की प्रतीक्षा में
                                                                                                                  -अनूप 
चतुर्वेदी

EatiNg MaGg! !!!!!@@@!!!!!

''Lyf  Without AdvEntuRe''  8| 󾆰 8|
''ConVer$at!on Without CoNfus!oN''  󾌯󾌯󾍁󾌯󾌯 
And ''Khane K@ M@JA''.....WithOut ''''KhAufF & FeAR''';󾌽󾌽   HoNi Ni Sakta Ha!, 󾍇

HeiGht Of Nonsense :-- 󾌩󾌩

Ek Tym Tha   Jab Ladkiya DusRo Ki FavoRite Hoti Thi !!!!󾮗
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After J@b We M€t Ke Baad Apne Aap ki FAvoRite HoNe L@g GYi....󾌴󾮠󾌴󾍇