Ek
FILM में चाय बेचने वाला ''मिलियनेयर'' बनता है Real Life में Prime Minister.......काश हम सब चाय वाले होते | किस्मत हो तो चाय बेचने वालो जैसी |
Saturday, May 16, 2015
देश की दिशा
अतीत में जो ''Ruling PartY'' थी जब Vo ''FDI'' लेकर आती थी तो अतीत की ''Opposition Party'' उसका विरोध करती थी और जब कल की ''Opposition party'' जो आज की ''Ruling Party'' है| वो ''FDI'' लेकर आती है तो कल की ''Ruling Party'' जो आज की ''Opposition Party'' है | वो उसका विरोध करती है | क्या राजनीति है | भाई?
छल-छंदों से
एक बात तो स्पष्ट है की बिना विभीषण के लंका विजय नही हो सकती है | किन्तु संशय इस बात से होता है की ''किरण बेदी''जैसे लोग अपने सिद्धांतों से क्यों समझौता कर लेते है |
"युद्धों में कभी नहीं हारे हम डरते हैं छल-छंदों से ,हर बार पराजय पायी है अपने घर के जयचंदों से"....@Dr. Kumar Vishwas........
"युद्धों में कभी नहीं हारे हम डरते हैं छल-छंदों से ,हर बार पराजय पायी है अपने घर के जयचंदों से"....@Dr. Kumar Vishwas........
हिंदू धर्म के पक्ष में अगर कुछ बोलना ही है तो ऐसी बात तो करो, जो हिंदू औरतों को पसंद आए।
जो बाबा-महाराज सलाह देते है कि हिंदू औरतों को चार बच्चे पैदा करने चाहिए। वो खुद पहले चार बच्चे पैदा करे । क्यों की ''चाणक्य नीति'' कहती है | की उदाहरण रखो, उदाहरण बनो, किसने तुम्हें रोक रखा है? बढ़ो, आगे बढ़ो…”-सुमित चतुर्वेदी के दृष्टिकोण से
Wi-Fi Ki politics
देखिये जब आपको 'Authority &
Responsibility'' प्राप्त होती है तो Automatically Aap ki
Accountability bhi Banti hai....Bt Jab Aap ''Prime Minister''{चाय वाले} 10 लाख का सूट !!! पहनते है | और Apne Ministers Ke ''विवादास्पद बयान''...Par Silent रहते है तो Public को ये बात ''Digest, नहीं होती है | इसलिए ye Result toh
Expected tha ही |
Friday, May 15, 2015
We Are ‘’Human’’ 1st, Before ‘’Being Human’’
We
Are ‘’Human’’ 1st, Before ‘’Being Human’’
देखिये आज कल चर्चा में ‘’Being Human’’ है ये ‘’Being Human’’ है Bollywood
के ‘’दबंग खान सलमान’’ 13 सालो बाद तो इनको सजा मिली और उसके कुछ घंटो में ही
हाईकोर्ट से दो दिन की अंतरिम जमानत मिल गयी | ये Being-Human का ‘Stardom’ है या हमारे न्यायालो पर एक सवाल ? बाद में उच्य न्यायालय ने
निचली अदालत से मिली सजा को निलंबित कर दिया | देखने वाली बात ये की समस्त Bollywood परिवार सलमान के Support में साथ था | जेसे की इनको गलती की सजा नही बिना किसी गलती की सजा मिली हो | Ek ‘’Famous Singer’’ ने इनके Support में ;Tweet’ किया ‘’ध्यान केंदित करना- ‘’कुत्ता
रोड पर सोएगा,कुत्ते की मोत मरेगा रोड गरीब के बाप की नही है’’ | ये शब्द थे| Singer अभिजीत भट्टाचार्य के अब इन मंदबुद्धि को कोन समझाये
की जिन लोगो ने इनको ‘’अभिजीत
भट्टाचार्य से, अभिजीत दा’ बनाया आज ये एक झूठी
हमदर्दी दिखाने के लिए उन लोगो को ही कुत्ता बोल रहे है | चलो जाने दीजिए एक दिन इनका
भी वक़्त आयेगा | हो सकता है की ये नया शोध हो कि फुटपाथ कुत्तों के लिए होता है आदमियों के लिए नहीं। क्यों की हमारी Society और इनकी Society भिन्न-भिन्न
है | Like A Deepika Padukone – 'My Choice'….
इन दिनों सलमान के परोपकारो की चर्चा है वो
सब की बड़ी मदद करते है इस लिए इनकी सजा माफ़ होनी चाहिए | क्या सलमान खान हमेशा से
ही एसे इंसान थे ? हो सकता है ‘’Being Human’’Foundation का
Idea उनके वकीलों ने दिया हो 2005-06 में जब उनके Defence के लिए
कोई रास्ता नही बचा हो | की आप समाज के
मसीहा बनिए दान-पुन कर के ‘’May be In Future Vo Aap ke Defence’’ के लिए एक
अच्छा [Weapon’] हो | मान भी लिया जाये की ऐसा नही था .....तो भी क्या सलमान खान
हामेशा से एक दरिया दिल इन्सान थे ? मेरे हिसाब से उत्तर है बिल्कुल नही ....1998 ‘’हम
साथ साथ है’’- फिल्म की Shooting के वक़्त ‘’काले हिरण का Matter हो या 2001 में ऐश्वर्या
राय के पिता द्वारा पुलिस में सलमान की शिकायत हो या फिर उनकी GirlFriend, से उनके रिश्ते ‘’सोमी अली, संगीता बिजलानी, या कटरीना कैफ’ हो
सब ने सलमान का रुद्ध-रूप देखा और उनसे दूर चली गयी या फिर ऐश्वर्या
राय के मित्र विवेक अब्रॉय से उनका पंगा हो वो तो Media की चर्चा में काफी वक़्त तक
रहा था | nd Big-Boss हो या कोई ‘’Award
Function’’ सलमान के स्वभाव से सब परिचित है.......मुझे
2003 के News-paper की Ek Line याद आती है’|
‘’हिरण का करे शिकार हीरोइन से करे तकरार अंधा धूत चलाये
कार हीरो बना खूखार | देखिए आप बहुत से लोगो के लिए ‘’IDOL’’ है आप अपनी गलती को
Accept, करे और एक Example set करे असली ‘’Being Human’’ वाला | की हाँ मुझसे गलती हो गयी और में उसके लिए प्रायश्चित करता हूँ ....आप कभी भी एसी गलती ना करे जो मेंने की तब
जाकर सलमान भाई आप के सच्चे Being-Human बनेगे | और अंत में ''चाणक्य नीति'' कहती है इंसान को उसकी गलती की सजा मिलनी ही चाहिए वो आज मिले या कल क्यों की
इंसान बदलता है उसकी फिदरत नही |
ये मेरे अपने विचार है ! सुमित चतुर्वेदी
Monday, May 11, 2015
फिक्र
इंसान जित्ती फिक्र अपनी सेहत की नहीं करता, उससे कहीं ज्यादा बालों की करता है। दो-चार बाल झड़े नहीं कि चिंता में डूब जाता है। तरह-तरह के तेल-क्रीम-शैंपू इस्तेमाल करता रहता है। लेकिन प्यारे बाल तो बाल हैं; न किसी के रोके रुके हैं, न किसी के टोके इंसान जित्ती फिक्र अपनी सेहत की नहीं करता, उससे कहीं ज्यादा बालों की करता है। दो-चार बाल झड़े नहीं कि चिंता में डूब जाता है। तरह-तरह के तेल-क्रीम-शैंपू इस्तेमाल करता रहता है। लेकिन प्यारे बाल तो बाल हैं; न किसी के रोके रुके हैं, न किसी के टोके टूटे। जिसे गंजा होना है, वह तो होकर ही रहेगा, चाहे कु छ कर लो।
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