पितृ पक्ष हो, या कोई भी पक्ष, 'श्राद्ध हो, या कोई 'उत्सव, पुण्य बस, ब्राह्मणो को या किसी को भोजन कराने भर से नहीं मिलता है | पुण्य के लिए हृदय से, और व्यापक स्तर, पर ''राष्ट्र के लिए, भगवान के लिए, अपनों के लिए,'' 'समर्पित होना पड़ता है | कुछ महीनो पूर्व अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) में लोगो ने बहुत पुण्य के काम किये श्रद्धालु की बहुत सेवा की किन्तु ''खाने की स्टाल'' के साथ, एक डस्टबिन (कचरे का डिब्बा) साथ रखते तो, यकीन मानिये भगवान और ज्यादा प्रसन्न होते | खेर जाने दे, अब श्राद्ध करने के बाद ''दोना पत्तल'' गली-मुहल्लों और सड़क में ना डाले डस्टबिन में या किसी प्लास्टिक,कपडे या आटे के बैग में डाले | और सुबह सफाई कर्मचारी को दे | आप से एक अनुरोध | आइये हम सब मिलकर बनाये अपने सपनो का भारत ''समृद्ध भारत'' ‘स्वच्छ भारत ''|
Tuesday, October 2, 2018
Thursday, September 20, 2018
Reality Behind #Ministry's Shuffling !!
2018 में "उमा भारती" जी ने अपना ''सिर कलम, करने का वादा किया था ! विकास के रिपोर्ट कार्ड में "मोक्षदायिनी गंगा और यमुना, का विकास धरातल पर तो दिख नहीं रहा | स्वर्ग का मुझे पता नहीं | मंदिर ना सही भक्तो को एक गर्दन तो मिलनी चाहिये माल्यार्पण करने को, अब किस मुँह से हम गंगा संरक्षण मंत्री, "नितिन गडकरी जी से उनका सर मांगे, | #गडकरी जी तो कह देंगे जिसने वादा किया था | वो ही निभायेगा, हमे तो कुछ वर्ष पूर्व ही ज़िम्मेदारी मिली है हमारे गर्दन वाले दायित्व में वक़्त है अभी | और इसके विपरीत जायेंगे तो #उमा जी बोल देंगी गंगा,आपको रिपोर्ट कार्ड में सर्वोच्च स्थान पर दिखती !! पर क्या करे आपके प्रधानमंत्री जी और उच्च मंत्रिमंडल ने विश्वास ही नहीं किया हम पर | 😞 "मंत्रियों और अफसरों', के तबादले बस एक दूसरे की गर्दन बचाने का जरिया भर ही है | दुर्भाग्य ही है की यहाँ देश हित के लिए कुछ नहीं होता |
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