Friday, December 19, 2025

                            सिस्टम को ऐसे इंसान चाहिए जो सवाल न पूछें

विडंबना यह है कि आज सूचना का विस्फोट है,
पर आत्मचिंतन का अकाल। लोग ब्रह्मांड की खबरें पढ़ते हैं,
पर अपने भीतर झाँकने से डरते हैं। आज का श्रमिक केवल श्रम नहीं बेच रहा—
वह अपना समय, अपनी ऊर्जा और अपनी चेतना बेच रहा है। दिन भर मशीन की तरह काम
● थका हुआ शरीर ● सस्ता मनोरंजन ● नींद
→ फिर वही चक्र।
इस ढाँचे में आत्मचिंतन के लिए कोई जगह छोड़ी ही नहीं गई।
सिस्टम को ऐसे इंसान चाहिए, जो सवाल न पूछें,
थके रहें, और खाली समय में सोचें नहीं—बस खपत करें।
इसीलिए एंटरटेनमेंट को आराम के रूप में नहीं, डिस्ट्रैक्शन के रूप में डिज़ाइन किया गया है।
यह सुख नहीं देता, यह सुन्न करता है— ताकि आदमी अपने दर्द, अपने प्रश्न
और अपने उद्देश्य से भागता रहे। श्रमिक को उतना ही दिया जाता है
कि वह टूटे नहीं, लेकिन इतना कभी नहीं कि वह जाग जाए। 
और इसी कारण आत्मचिंतन आज एक लक्ज़री बना दिया गया है—
जो केवल वही कर सकता है जिसके पास समय है, ऊर्जा है और सबसे ज़रूरी—डर से आज़ादी।
फिर भी इतिहास गवाह है— चेतना हमेशा
सबसे कठिन परिस्थितियों में ही जन्म लेती है। Description: 🚩
— #SumitMonss के ब्लॉग से  #सच्चाई #आत्मचिंतन 
#SystemTruth #Consciousness

Friday, August 15, 2025

 आज़ादी के 78 साल बाद… बिस्मिल, माफ़ करना

हे, बिस्मिल तुम भोले थे सच में बहुत,
               झूमकर फाँसी पर चढ़ते हुए तुम कह गए- “शहीदों की मज़ारों पर लगेंगे हर बरस मेले”

"शहीदों की मज़ारों पर मेले नहीं लग पाते, बिस्मिल, भारत आधुनिक हो गया है, और आधुनिक जीवन की व्यस्तताएँ साँस कहाँ लेने देती हैं। नोजवानो को टिक-टोक पर मुजरा करने से फुसरत कहाँ है? सोशल मीडिया पर लोगो हिन्दू-मुस्लिम करने से फुसरत कहाँ है? डिबेट्स में बस एक दूसरे को नीचा दिखाने से फुरसत कहाँ है, एक मीडिया को दूसरी मीडिया को गाली देने से फुरसत कहाँ है? नेताओ को कुर्सी के सिवा फुसरत कहाँ है ? एक लड़के को एक लड़की के प्यार से फुरसत कहाँ है? इंसानो को अपने भविष्य की सूद से फुरसत कहाँ है? "सब व्यस्त है बिस्मिल अच्छा हुआ तुम चले गए, तुम्हारे बाद देश का विभाजन हो गया। विभाजन से पैदा हुआ भारत बँटता ही रहा है। टूट की दरारों में ही स्वार्थ के वृक्ष उगाए जा रहे हैं, धर्म के नाम पर, जात के नाम पर, मुल्क के नाम पर, "गोरे साहबों का स्थान भूरे साहबों ने ले लिया है, किंतु सत्ता की नीति वही है- क्षेत्र की, राज्य की, धर्म की। जिस परस्पर सम्मान से तुम और अशफ़ाक़ गले मिला करते थे वो उस असुरक्षित राजनीति को भाता नहीं है । अच्छा हुआ तुम चले गए । तुम न देख पाते यह भारत । माफ़ करना भाई पर मज़ारों पर मेले नही लगते है । #सुमितमोन्स #Sumitmonss के ब्लॉग से .. भूतपूर्व पोस्ट -19th December 2019

Sunday, August 10, 2025

भक्ति का माप बाहरी चिह्न नहीं, भीतरी पवित्रता है -चरित्रवान बनो।

सिर्फ कंठी पहन लेने या दीक्षा ले लेने से कोई सच्चा भक्त नहीं बनता। अगर जीवन में तामसिक भोजन है (जो रजोगुण और तमोगुण को बढ़ाता है), गलत और अनैतिक रिश्ते हैं — चाहे वो शादीशुदा हों या किसी भी मर्यादा के विरुद्ध — और आचरण शुद्ध नहीं है, तो आपकी दीक्षा केवल एक दिखावा बनकर रह जाती है। जो लोग दिखावे के लिए 'राधा-राधा' बोलने वाली काउंट मशीनें और भक्तिभाव के नाम पर खिलौने साथ लेकर घूमते हैं — समझ लें कि इन बाहरी चीज़ों से आत्मा नहीं जुड़ती।

धर्म का सार मशीन में नहीं, मन की मौन गहराई में है।

धर्म बाहरी चिह्नों से नहीं, भीतर की पवित्रता, संयम और शुद्ध विचारों से पहचाना जाता है।

दीक्षा तभी सार्थक होती है जब वह जीवन में उतरे  

— आचरण, भोजन, दृष्टिकोण और संबंधों में शुद्धता बनाकर।

सुधरना है तो भीतर से सुधरो — वरना ये कंठी तोड़कर फेंक दो।

धर्म कोई दिखाने की वस्तु नहीं, जीने का मार्ग है।"

#धर्म #सुमितमोन्स #Sumitmonss के ब्लॉग से ...... 💐

 मृत्यु उत्सवमस्ति यत्र आत्मा विमुक्तिः।

न हि शोच्यं शरीरं, यः याति ब्रह्म स्थितिम्॥"

श्री नानाजी सुदामा लाल तिवारी जी (गल्लू गुरु)
जी के तिरोभाव उत्सव (चतुर्थ पुण्यतिथि) पर
हम उनके श्री चरणों में कोटि-कोटि वंदन अर्पित करते हैं।
आपश्री ने जीवन भर धर्म, सेवा और सदाचार का मार्ग प्रशस्त किया।
आपका तपस्वी जीवन और उच्च आदर्श हम सभी के लिए
प्रेरणा स्रोत हैं और सदा रहेंगे।
आपकी दिव्य स्मृति हमारे हृदय में अमिट है।
आपके दिखाए मार्ग पर चलकर ही हम सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित कर सकते हैं।
#28June2025