नही होते है, ''मंदिरों के निर्माण'' कही एक दिन में आहुतियां देनी पड़ती है, अपने मन, बल, तप, ओर प्राणों की इस धारा पर मंदिरों (भवन) के निर्माण के लिए । मेरे ताऊ जी स्वर्गीय श्री "गोवेर्धन नाथ चतुर्वेदी" ओर स्वर्गीय श्री "अशोक सिघल" जी उसी शख़्सियत के उदाहरण है । श्री राम जन्मभूमि आन्दोलन के वक्त का चित्र । #राम_मंदिर_ही_बनेगा 🚩

