एक तरफ तो हम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की बात करते है | और एक तरफ हम एक ''सच्चे ऐक्सीडेंट'' पर बनी फिल्म पर प्रतिबंध लगाते है । ''Reason'' देते है की इस से हमारे समाज पर एक गलत ''Message' 'जायेगा इतनी फिल्मे बनती है उनसे कोन सा सही संदेश जाता है !! ये दोहरा मापदण्ड क्यों ? यहाँ तो भी.…… एक झंझोर देने वाली शर्मनाक घटना है। शायद लोगों को कुछ सोचने पर मजबूर करेगी !! --सुमित चतुर्वेदी
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