Saturday, May 16, 2015

छल-छंदों से

एक बात तो स्पष्ट है की बिना विभीषण के लंका विजय नही हो सकती है | किन्तु संशय इस बात से होता है की ''किरण बेदी''जैसे लोग अपने सिद्धांतों से क्यों समझौता कर लेते है |
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युद्धों में कभी नहीं हारे हम डरते हैं छल-छंदों से ,हर बार पराजय पायी है अपने घर के जयचंदों से"....@Dr. Kumar Vishwas........

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