इंसान जित्ती फिक्र अपनी सेहत की नहीं करता, उससे कहीं ज्यादा बालों की करता है। दो-चार बाल झड़े नहीं कि चिंता में डूब जाता है। तरह-तरह के तेल-क्रीम-शैंपू इस्तेमाल करता रहता है। लेकिन प्यारे बाल तो बाल हैं; न किसी के रोके रुके हैं, न किसी के टोके इंसान जित्ती फिक्र अपनी सेहत की नहीं करता, उससे कहीं ज्यादा बालों की करता है। दो-चार बाल झड़े नहीं कि चिंता में डूब जाता है। तरह-तरह के तेल-क्रीम-शैंपू इस्तेमाल करता रहता है। लेकिन प्यारे बाल तो बाल हैं; न किसी के रोके रुके हैं, न किसी के टोके टूटे। जिसे गंजा होना है, वह तो होकर ही रहेगा, चाहे कु छ कर लो।
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