Wednesday, July 14, 2021

भगवद्धाम गमन पर अनेकानेक प्रणाम ।

वैदिक- परम्परा के सच्चे अनुयायी, गुरु- गोपाल में अनन्य- निष्ठा वाले, संहिता- पाठी चतुर्वेद- विद्वान् श्रीसुदामालाल जी तिवारी ( गल्लू- बाबा ) ने आज ब्राह्म-वेला में गोलोक- गमन किया ।

वैदिक परम्परा तो अब थोड़ा-बहुत  पूजा- पाठ, यज्ञ- अनुष्ठान तक ही सीमित रह गयी है । कलिकाल में हम ब्राह्मण भी वैदिक कहलाते तो हैं लेकिन वैदिक आचरण, वैदिक सभ्यता और मर्यादा को कहाँ पालन कर पाते हैं !!

नये जमाने के साथ चलने का तर्क, समय की माँग, रोजी- रोटी का प्रश्न और न जाने क्या- क्या समस्याऐं हैं हमारी !! 


किन्तु आदरणीय गल्लू- बाबा इस कठिन युग में भी वैदिक- सदाचार और मर्यादा के अविचल प्रतीक थे । बहुत अल्प समय के लिये ही सही , लेकिन  आपकी संगति में रहकर आपकी पवित्र-दिनचर्या, जप-तप- स्वाध्याय,  और वैष्णवता का दर्शन और प्रेरणा अवश्य मैंने प्राप्त की है ।


प्रायः आपके निवास के आगे से निकलना रहता है । अस्वस्थता के कारण आप ऊपर खिड़की में से ही ( मेरा ध्यान न होने पर भी ) स्वयं ' जय- गोपाल ' की आवाज लगाकर स्नेह प्रदान करते थे ।  बीमारी में भी मन्द- मुस्कान हमेशा देखनी मिली । अब उस मार्ग से निकलने पर अवश्य खेद रहेगा ।


अस्तु ! आप जैसे ब्राह्मण तो दूसरों को भी अपने दर्शन और संगति से पवित्र करते हैं - 


" ये ब्राह्मणास्त्रिसुपर्णं पठन्ति, ते सोमं प्राप्नुवन्ति ।

   आसहस्रात् पङ्क्तिं पुनन्ति ।"... 


 आपके भगवद्धाम गमन पर अनेकानेक प्रणाम 🙏🙏

शब्द ~ धीरेंद्र शास्त्री चतुर्वेदी 



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