Monday, February 3, 2020

"देश के इन गद्दारों को गोली मारो सालों को"

"देश के इन गद्दारों को गोली मारो सालों को"
आखिर देश के ग़द्दार है कौन ?
गद्दारों की परिभाष दी किसने ?
कौन तय करेगा, ग़द्दार है कौन?
सियासी विचारधारा में भेद होने से कोई ग़द्दार हो गया !!
भुखमरी से आज़ादी, जातिवाद से आज़ादी , भ्रष्टाचार से आज़ादी, हिंसा से आज़ादी, धर्म के नाम पर विभाजन से आज़ादी, यह खोखली व्यवस्था से आज़ादी, मांगने वाले सब ग़द्दार है" ?
                                                                   तो फिर अपने राजनीतिक फायदे के लिए वोटो का दुर्वीकरण करने वाले ग़द्दार नहीं है? देश को जलाने वाले ग़द्दार नहीं, मंदिर- मस्जिद तोड़ने वाले ग़द्दार नहीं ? अपने आरक्षण की मांग के लिए सरकारी सम्पति को जलाने और नुकसान पहुंचाने वाले लोग देश के ग़द्दार नहीं ? सरकारी बिजली की चोरी करने वाले देश के ग़द्दार नहीं, चलते हुई सड़क पर थूकने वाले, गन्दा करने वाले देश के ग़द्दार नहीं ? अपने फायदे के लिए देश के संसाधनो को नष्ट करने वाले ग़द्दार नहीं ? दहेज़ के लिए देश की बेटियों को जलाने और मार देने वाले ग़द्दार नहीं ? सरकारी पद पर बैठा हर इंसान जो तनख़्वाह भी लेता है और काम करने के लिए रिश्वत भी वह ग़द्दार नहीं ? हर वो डॉक्टर, एडवोकेट, चार्टर्ड एकाउंटेंट, इंजीनियर जो अपने फायदे के लिए गलत काम करते है या फिर गलत सलाह देते है लोगो को, वह देश के ग़द्दार नहीं ? वह पुलिस वाला जो अपराध होते देख कर भी कुछ नहीं करता क्या वह देश का ग़द्दार नहीं ? जो व्यापारी या इंसान अपने फायदे के लिए कानून की धज्जियां उड़ाते है वह देश का ग़द्दार नहीं ? तो फिर आप कैसे तय करेंगे ग़द्दार है कौन ??
हाँ पाकिस्तान की भाषा बोलने वाले और राष्ट्रगान और राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करने वाले, भारत को तोड़ने वाले तो ग़द्दार है ही | किन्तु सब कैसे ?

No comments:

Post a Comment